|
दूरसंचार क्षेत्र को देश में विकास और वृध्दि के एक प्रमुख
प्रणेता के रूप में पहचान मिली है। आज,
भारत का दूरसंचार नेटवर्क,
लगभग 210
मिलियन टेलीफोनों के साथ विश्व के वृह्दतम नेटवर्कों में
से एक है और यह एशिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में
दूसरा बड़ा नेटवर्क है। हमनेर् वा 2006-07
में 70
मिलियन टेलीफोन कनेक्शन प्रदान किए हैं जो कि
2005-06 में प्रदान किए गए कनेक्शनों
से 66% अधिक हैं। अक्टूबर
2004 में ब्रॉडबैंड नीति की
घोाणा के बाद देश के 900 से
अधिक शहरों में लगभग 2.5 मिलियन
कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।
भारतीय
दूरसंचार क्षेत्र में लगभग सभी मोरचों पर नाटकीय परिवर्तन
हुए हैं। अब एकाधिकार का स्थान बहुप्रचालकों की
प्रतिस्पध्र्दात्मक व्यवस्था ने ले लिया है,
और प्रशुल्कों में भारी कटौती हुई है
(लंबी दूरी की सेवा के लिए 30-
रुपए प्रतिमिनट से 1- रुपए
प्रति मिनट तक (वन-इंडिया प्लान)। निजी क्षेत्र का हिस्सा
बढक़र 66% से अधिक हो गया है और
मोबाइल टेलीफोनी का अंश 80% तक
हो गया है।
दूरसंचार
क्षेत्र के कार्य की व्यापक रूप से प्रशंसा हुई है परंतु,
हमें विकसित देशों के स्तर तक पहुंचने
के लिए अभी काफी प्रयास करने होंगे। इसलिए हमने
2010 के अंत तक 500
मिलियन टेलीफोन कनेक्शन देने और
20 मिलियन टेलीफोन उपभोक्ताओं को
ब्रॉडबैंड कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया
है। सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि की सहायता से
1685 वाणिज्यिक रूप से अव्यवहार्य
एसडीसीए में 13 लाख से भी अधिक
ग्रामीण सीधी एक्सचेंज लाइनें प्रदान की गई हैं।
हम
बड़ी तेज़ गति से विस्तार कर रहे हैं और साथ ही साथ हम सेवा
का विश्व स्तरीय स्तर प्रदान करने के सभी संभव प्रयास भी
कर रहे हैं। ट्राई सभी प्रचालकों के लिए सेवा के स्तर की
नियमित रूप से निगरानी कर रहा है। मोबाइल नेटवर्क में
भीड़-भाड़ को कम करने के लिए मोबाइल सेवा के उपयोग हेतु
अतिरिक्त स्पेक्ट्रम का आबंटन भी करवाया जा रहा है।
आशा
है, कि आपको यह साइट उपयोगी
लगेगी। आपकी प्रतिक्रिया और सुझावों से हमें इस साइट में
सुधार लाने में सहायता मिलेगी।
|