l
दूरसंचार
1.
प्रस्तावना
दूरसंचार
अर्थव्यवथा के विभिन्न सेक्टरों के तीव्र विकास और आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक एक
प्रमुख सहायक सेवा है। सूचना प्रौद्योगिकी के प्रचुर विकास और शेा अर्थव्यवस्था पर
इसके उल्लेखनीय प्रभाव के कारण यह हाल के वर्ाों में और भी महत्वपूर्ण बन गया है।
ऐसा माना गया है कि भारत सूचना प्रौद्योगिकी में और सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित
सेवाओं में तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है। तथापि इस स्थिति को बनाए रखना
अनिवार्यत: दूरसंचार अवसंरचना की उच्च गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसको ध्यान में
रखते हुए दसवीं योजना का जोर उचित दरों पर विश्व स्तरीय दूरसंचार सुविधाएं उपलब्ध
कराने पर होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों मे दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराना तीव्र
आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक अन्य
प्राथमिकता क्षेत्र होगा। यद्यपि हाल के वर्ाों में दूरसंचार नेटवर्क का तेजी से
विकास हुआ है परंतु इसकी बढाेत्तरी में दसवीं योजना में और तेजी लाए जाने की
आवश्यकता है। अन्य देशों में प्रचलन के अनुरूप इस सेक्टर में संरचनात्मक परिवर्तनों
में तेजी लाना भी यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि समग्र अर्थव्यवस्था
में तीव्र विकास कायम रखने के लिए अपेक्षित पैमाने पर दूरसंचार सेवाएं न केवल
उपलब्ध हों बल्कि उनकी लागत भी आधुनिकीकरण की ओर उन्मुख अर्थव्यवस्था की अपेक्षाओं
के अनुरूप हों।
1.2
एक गतिशील सेक्टर के लिए सुधार एक सतत प्रक्रिया है जो कि प्रौद्योगिकीय नवीन खोजों
सहित परिवर्तन की गति के मद्देनज़र जरूरी हो गई है।
1991
से भारत में दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों की एक सतत प्रक्रिया देखी गई है। अप्रैल,
2002 से
अंतरराट्रीय लम्बी दूरी सेवाओं और इंटरनेट टेलीफोनी की शुरूआत से उदारीकरण और
स्पर्धा के लिए इस सेक्टर को खोले जाने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। विभिन्न सेवाओं
की अभिसारिता एक प्रमुख नया उभरता क्षेत्र है और दूरसंचार क्षेत्र को दसवीं योजना
में इस पर ध्यान देना होगा।
1.3 1999
में घो31ाित
नई दूरसंचार नीति (एनटीपी) द्वारा वैश्विक रूप से दूरसंचार क्षेत्र में घटित हो रहे
दूरगामी प्रौद्योगिकीय विकासों को ध्यान में रखते हुए और भारत को एक वैश्विक सूचना
प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने के सरकार के संकल्प को कार्यान्वित करने की दृ31टि
से एनटीपी
1994
में संशोधन
किया गया है। एनटीपी,
1999 का
उद्देश्य एनटीपी,
1994 के
कार्यान्वयन से उत्पन्न हुई समस्याओं का भी समाधान करना है। एनटीपी
1999
के उद्देश्य हैं
:-
·
नागरिकों के
लिए वहनीय और प्रभावी संचार सुविधा उपलब्ध कराना ।
·
ग्रामीण
क्षेत्रों सहित सभी सेवारहित क्षेत्रों को सार्वभौमिक सेवा के प्रावधान और देश की
अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम उच्च स्तरीय सेवाओं के प्रावधान
के बीच संतुलन प्रदान करने का प्रयास करना।
·
देश के
दूरवर्ती,
पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में दूरसंचार सुविधाओं के विकास को
प्रोत्साहन देना।
·
सूचना
प्रौद्योगिकी,
मीडिया,
दूरसंचार और उपभोक्ता
इलेक्ट्रॉनिकी की अभिसारिता को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक और कुशल दूरसंचार
अवसंरचना का निर्माण करना और इसके द्वारा भारत को सूचना प्रौद्योगिकी में एक
महाशक्ति बनने के लिए प्रेरित करना।
·
जहां कहीं उचित
हो,
पीसीओ को इंटिग्रेटेड सर्विस डिजीटल नेटवर्क (आईएसडीएन) सेवाएं,
दूरवर्ती डाटाबेस अभिगम,
सरकारी और
सामुदायिक सूचना प्रणालियों आदि जैसी मल्टी मीडिया सेवाएं प्रदान करने वाले पब्लिक
टेलीइन्फो केन्द्रों में बदलना।
·
शहरी और
ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में दूरसंचार सैक्टर को एक समयबध्द तरीके से ऐसे अधिक
प्रतिस्पध्र्दात्मक वातावरण में बदलना,
जहां सभी सेवा प्रदाताओं को समान अवसर मिल सके।
·
देश में
अनुसंधान और विकास संबंधी प्रयासों को सुदृढ क़रना तथा विश्व-स्तरीय विनिर्माण
क्षमताओं का निर्माण करने के लिए एक प्रेरणा शक्ति प्रदान करना ।
·
स्पैक्ट्रम
प्रबंधन में दक्षता और पारदर्शिता प्राप्त करना।
·
देश की रक्षा
और सुरक्षा हितों को संरक्षण प्रदान करना।
·
भारतीय
दूरसंचार कंपनियों को सच्चे रूप से वैश्विक सेवा प्रदाता बनने में समर्थ बनाना।
2.
नौवीं योजना में
समीक्षा
2.1
नौवीं योजना अवधि
के दौरान,
देश में दूरसंचार
सेवाओं में रिकार्ड वृध्दि दर हासिल हुई। नेटवर्क (सज्जित क्षमता) में लगभग
22
प्रतिशत औसत दर से
वृध्दि हुई। सेल्यूलर मोबाइल फोनों और फिक्स्ड लाइन फोनों दोनों में वृध्दि समान
रुप से प्रभावोत्पादक रही है। जबकि निजी क्षेत्र का ध्यान सेल्यूलर मोबाइल फोनों पर
रहा,
सरकारी क्षेत्र
में वृध्दि मुख्यत: फिक्स्ड लाइन कनेक्शनों के कारण रही।
237
लाख सीधी एक्सचेंज
लाइने (डीईएल) प्रदान करने के लक्ष्य के स्थान पर नौवीं योजना के दौरान लगभग
240.55
लाख अतिरिक्त
डीईएल प्रदान किए गए हैं। सेल्यूलर नेटवर्क
3.40
लाख कनेक्शनों के
छोटे आधार से बढक़र योजना के अंत तक
64.31
लाख कनेक्शन तक
पहुंच गया है। इस वृध्दि के परिणामस्वरूप,
नौवीं
योजना की शुरूआत में टेलीघनत्व
1.57
से लगभग तीन गुना
बढक़र
31
मार्च,
2002 की
स्थिति के अनुसार
4.4
हो गया है।
इस संबंध में ब्यौरे नीचे तालिका में दिए गए हैं।
नेटवर्क विस्तार - नौवीं योजना
(लाइनें
लाख में)
|
|
31.3.1997
की स्थिति के अनुसार
|
निवल वृध्दि- नौवीं
योजना
|
31.3.2002
की स्थिति के अनुसार |
सीएजीआर
|
|
सार्वजनिक
|
निजी
|
कुल
|
% |
|
स्थिर
|
145.40 |
234.68 |
5.87 |
240.55 |
385.95 |
21.56 |
|
सेल्युलर
|
3.40 |
2.14 |
58.77 |
60.91 |
64.31 |
80.00 |
|
कुल
|
148.80 |
236.82 |
64.64 |
301.46 |
450.26 |
24.79 |
|
टेलीघनत्व
|
1.57
|
--
|
--
|
--
|
4.4
|
--
|
|
ग्रामीण सार्वजनिक टेलीफोन
|
2.61 |
2.061 |
0.00846 |
2.07 |
4.68 |
12.39 |
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों
अर्थात भारत संचार निगम लिमिटेड और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड का कार्य निपादन
उल्लेखनीय रहा है । मूल योजना में
185
लाख नए कनेक्शन प्रदान करने (जिसे बीएसएनएल और एमटीएनएल हेतु
मध्यावधि समीक्षा में संशोधित करके 222.7 लाख कर दिया
गया था ) और संपूर्ण क्षेत्र हेतु कनेक्शनों की संख्या 237
लाख करने (जिनमें निजी क्षेत्र भी शामिल हैं),
के लक्ष्य की तुलना में नौवीं योजना के दौरान उपलब्धि
240.55 लाख कनेक्शन हैं जिसमें निजी क्षेत्र का अंशदान भी शामिल
है अर्थात नौवीं योजना दस्तावेज में परिकल्पित लक्ष्य से भी अधिक है। नौवीं
योजनावधि के दौरान निजी क्षेत्र द्वारा सेल्युलर सेवाओं की शुरूआत की गई । महानगर
टेलीफोन निगम लिमिटेड ने तीसरे प्रचालक के रूप में दिल्ली और मुंबई में अपनी मोबाइल
सेवाओं की शुरूआत की थी । नौवीं योजना के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के
लक्ष्य और ब्यौरे नीचे दिए गए हैं ।
नौवीं योजना (1997-02)
|
वास्तविक
लक्ष्यऔरउपलब्धियां-दूरसंचार
योजना का नाम
|
मूल लक्ष्य
|
संशोधित लक्ष्य
|
1997-98
|
1998-99
|
1999-2000
|
2000-01
|
2001-02
|
|
लक्ष्य
|
वास्तविक
|
लक्ष्य
|
वास्तविक
|
लक्ष्य
|
वास्तविक
|
लक्ष्य
|
वास्तविक
|
लक्ष्य
|
वास्तविक
|
|
स्विचन क्षमता (लाख लाइनें)
|
230
|
298
|
36
|
35.18
|
49.3
|
47.89
|
54.7
|
67.17
|
72.35
|
71.3
|
82.46
|
75.83
|
|
दूरसंचार विभाग
|
200.6
|
273
|
30.8
|
32.3
|
44
|
43.75
|
49
|
63.02
|
67
|
67
|
77.76
|
70.33
|
|
एमटीएनएल
|
29.4
|
25
|
5.2
|
2.88
|
5.3
|
4.14
|
5.7
|
4.15
|
5.35
|
4.3
|
4.7
|
5.5
|
|
सीधीएक्सचेंज(लाखलाइनें)
|
185
|
222.7
|
29
|
32.59
|
36
|
37.92
|
45.5
|
49.18
|
52.4
|
59.25
|
72.3
|
57.88
|
|
दूरसंचार विभाग
|
160
|
200.7
|
24.6
|
28.65
|
31.5
|
35.45
|
40.6
|
45.4
|
48
|
56.29
|
68.3
|
53.07
|
|
एमटीएनएल
|
25
|
22
|
4.4
|
3.94
|
4.5
|
2.47
|
4.9
|
3.78
|
4.4
|
2.96
|
4
|
4.81
|
|
टीएएक्स(लाखलाइनें)
|
18
|
23.06
|
3.25
|
3.14
|
4.5
|
2.06
|
4.53
|
4.8
|
5.15
|
5.12
|
10.1
|
9.97
|
|
दूरसंचार विभाग
|
15.24
|
18.87
|
2.75
|
2.77
|
3.87
|
2.06
|
4
|
4.03
|
4
|
5.12
|
9
|
9.07
|
|
एमटीएनएल
|
2.76
|
4.19
|
0.5
|
0.37
|
0.63
|
-
|
0.53
|
0.77
|
1.15
|
-
|
1.1
|
0.9
|
|
माइक्रोवेवप्रणालियां(000कि.मी.)
|
90
|
70
|
18
|
17.99
|
19.5
|
14
|
15
|
19.88
|
10
|
21.03
|
7.5
|
14.45
|
|
ऑप्टिकलफाइबरप्रणाली(000कि.मी) |
140
|
270
|
22
|
23.82
|
35
|
31.77
|
40
|
63.27
|
100
|
55.35
|
126
|
99.02
|
|
वीपीटी(000संख्या) |
239.16
|
278.87
|
83
|
42.86
|
80.5
|
37.06
|
45
|
33.97
|
70
|
34.22
|
144
|
70.75
|
2.2
नौवीं योजना के दौरान निजी क्षेत्र
का कार्य निपादन मिला-जुला रहा । इसने सेल्युलर नेटवर्क के विस्तार में बहुत अच्छा
कार्य किया जबकि स्थिर लाइन के मामले में इसका कार्य-निपादन उल्लेखनीय नहीं रहा।
52 लाख (मूल) तथा
14.3 लाख की संशोधित लक्ष्य की तुलना में लगभग
5.9 लाख सीधी एक्सचेंज लाइनें ही संस्थापित की गई हैं ।
लाइसेंसिंग करारों, अयथार्थ उच्चतर लाइसेंस शुल्क,
राजस्व हिस्सेदारी,
मार्गाधिकार
इत्यादि जैसी बाध्यताएं मुख्य रूप से निजी क्षेत्र में धीमी प्रगति हेतु उत्तरदायी
हैं ।
2.3
सरकारी क्षेत्र हेतु नौवीं योजना के
लिए 46,442.04
करोड़ रु0
का परिव्यय अनुमोदित किया गया
था जिसे मुख्य रूप से आंतरिक और बजटेतर संसाधनों से वित्त पो31ाित
किया जाना था। इसमें 44.04
करोड़ रु0
की छोटी बजटीय सहायता शामिल
हैं जो ट्राई और बेतार अनुश्रवण संगठन (डब्ल्यूएमओ) जैसी विनियामक निकायों की योजना
परिव्यय का वित्त पोाण करने के लिए है। नौवीं योजना के लिए अनुमोदित परिव्यय केवल
सांकेतिक स्वरूप का था तथा संसाधनों के आधार पर वा31ार्िक
योजना परिव्यय निर्धारित किया जाना था जोर् वा के दौरान उपलब्ध होता ।र् वा दरर्
वा आधार पर अनुमोदित वा31ार्िक
योजना परिव्यय के आधार पर नौवीं योजना हेतु प्रचालनात्मक परिव्यय
84,783.90
करोड़ रु0
बनता है जिसमें 208.20
करोड़ रु0
की बजटीय सहायता शामिल है। इसकी तुलना में योजनागत परिव्यय
69,407.62
करोड़ रु0
हो जाने की संभावना है। यह मूल रूप से अनुमोदित परिव्यय का
163
प्रतिशत और अनुमोदित प्रचालनात्मक
परिव्यय का 89
प्रतिशत का प्रयोग दर्शाता है।
प्रचालनात्मक परिव्यय की तुलना में परिव्यय में कमी मुख्य रूप से कुछ नई परियोजनाओं
को शुरू करने में विलंब तथा उपस्कर की लागत में कमी के कारण एमटीएनएल और बीएसएनएल
कम व्यय होने के कारण आई थी । वित्त पोाण के मामले में,
आईईबीआर द्वारा लक्षित परिव्यय
(प्रचालनात्मक परिव्यय की तुलना में) की तुलना में कम थी जो मुख्य रूप से बाजार से
त्रऽण की आवश्यकता में कमी के कारण थी । बीएसएनएल और एमटीएनएल द्वारा आंतरिक
संसाधनों के सृजन में कमी का कारण अंशत: प्रशुल्क के पुनर्संतुलन को माना जा सकता
है।
3.
दूरसंचार नेटवर्क की वर्तमान स्थिति
3.1
बुनियादी दूरसंचार सेवाओं का नेटवर्क
आजादी के समय के लगभग 84
हजार कनेक्शन से बढक़र
31
मार्च,
2002 की स्थिति के अनुसार लगभग
385.95
लाख चालू कनेक्शन हो गया है। बुनियादी
सेवा नेटवर्क में बहुत बड़ी संख्या फोनों की है जो पूरे दूरसंचार नेटवर्क का
86
प्रतिशत है।
|
वर्तमान दूरसंचार नेटवर्क की
मुख्य विशेाताएं नीचे तालिका में दी गई हैं ः
टेलीफोन
नेटवर्क की स्थिति -
31.03.2002
की स्थिति के अनुसार
·
एक्सचेंजों
की कुल सं0 - 35,023
·
ग्रामीण एक्सचेंजों की सं0
- 26,953
·
कुल स्थिर टेलीफोन कनेक्शन -
385.95
लाख
·
सेल्यूलर मोबाइल फोनों की सं0
- 64.31 लाख
·
ट्रंक ऑटो एक्सचेंज लाइनें -
34.27
लाख
·
टेलीघनत्व - समस्त भारत -
4.4
·
ग्रामीण सार्वजनिक टेलीफोनों की संख्या -
4.68
लाख
·
इंटरनेट कनेक्शन -
38
लाख (31 जनवरी, 2002
की
स्थिति के अनुसार) |
4.
दसवीं योजना की
चुनौती
|
4.1
बाजार में
प्रतिस्पर्धा की शुरूआत के साथ सीधी एक्सचेंज लाइनों और नेटवर्क के समग्र
विस्तार के स्थान पर योजना का ध्यान समग्र नीतिगत उद्देश्यों के अनुरूप और
अपेक्षा के अनुसार क्षेत्रबाजार की वृध्दि के लिए अपेक्षित नीतिगत ढांचा प्रदान
कराने पर दिए जाने की आवश्यकता है। इस प्रयोजनार्थ समुचित नीतिगत पहलों ओर
प्रासंगिक विनियामक ढांचें का निर्धारण करने के लिए हमें कुछ कारकों को ध्यान
में रखना होगा। इस संबंध में विचारणीय मुख्य कारकरूझान नीचे दिए गए है
:
भावी
नीतिगत पहलों के लिए प्रासंगिक कारक और रूझान
·
वैश्विक
रूझानों और भारतीय अनुभवों के आधार पर,
आने वाले कई वर्ाों के लिए सेल्यूलर मोबाइल सेवाओं की
वृध्दि दर उच्चतर बनी रहेगी। इसकी दो महत्वपूर्ण बातें,
प्रति लाइन औसत लागत में कमी तथा सेल्यूलर
मोबाइलडब्ल्यूएलएल-एम ग्रामीण क्षेत्र में विस्तार के मुख्य साधन के रूप में
उभरेंगी।
·
अवसंरचना
प्रदाता रेलवे,
पावर ग्रिड कारर्पोरेशन इत्यादि के प्रवेश तथा अन्य
प्रदाताओं द्वारा बहुत अधिक मात्रा में क्षमता का संवर्धन करने के परिणामस्वरूप
उत्पन्न प्रतिस्पर्धा के कारण नेटवर्क की कम लागत और साथ ही उपस्कर की लागत में
लगातार कमी के कारण अगले पांच वर्ाों में निवेश के लिए पूंजी संबंधी आवश्यकता
वर्तमान से कम रहने की संभावना है।
·
उपभोक्ता
का एक छोटा भाग काल राजस्व का बहुत बड़ा हिस्सा प्रदान करता है। यह उच्च राजस्व
वाला उपभोक्ता वर्ग प्रचालकों के बीच प्रतिस्पर्धा का केन्द्र होगा जिससे इस
प्रकार के,
अर्थात लंबी दूरी की कॉलों पर लागू प्रशुल्कों में और कमी
आएगी। इसके परिणामस्परूप,
लंबी दूरी के प्रशुल्क
विनियामक द्वारा निर्धारित किए गए प्रशुल्कों से भी कम हो जाएगें।
·
प्रतिस्पर्धा के कारण कालांतर में अधिशेा की मात्रा में कमी आएगी। तथापि,
लागत में गिरावट के कारण प्रति उभोक्ता राजस्व में भी कमी
आएगी।
·
वॉएस
टेलीफोनी की तुलना में डाटा सेवाओं में बहुत तीव्रतर वृध्दि होने की संभावना
है। इससे यथासमय ब्रॉडबैंड लिंकेज पर ध्यान देने की आवश्यकता के महत्व का पता
चलता है,
जिससे अपेक्षित दर पर ये सेवाएं प्रदान कराने में समर्थ हुआ
जा सके।
·
देश के
ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों का बहुत बड़ा भाग सुविधारहित होने के कारण,
जिससे कम आय होने की भी संभावना है यूएसओ पर बहुत अधिक भार
पड़ने की संभावना है।
·
सेवाओं की
अभिसारिता के प्रति रूझान से उद्योग और बाजार की संरचना में व्यापक बदलाव आ
सकता है।
|
4.2
दूरसंचार भारत में
तीव्र गति से बढता हुआ सेक्टर है। तथापि,
वैश्विक
वृध्दि पध्दति और संकेतकों से देखने पर यह क्षेत्र अभी भी विकास के आरंभिक चरण पर
है।
24.98
की चीन की उपलब्धि
तथा
37.28 (दिसम्बर,
2001) के
वैश्विक औसत की तुलना में हमारा टेलीघनत्व केवल
4.01
था। कुछ विकसित और विकासशील देशों में टेलीघनत्व की तुलनात्मक स्थिति नीचे दी गई
है।
दूरसंचार
विकास - अंतरराट्रीय तुलना
|
(दिसम्बर,
2001
की स्थिति के अनुसार)
देश
|
जनसंख्या
|
प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद
|
डीईएल
स्थिर
|
सेलफोन
|
कुल
फोन
|
टेली-घनत्व
|
|
|
(करोड़
में)
|
(अमरीकी
डालर)* |
(लाइनें
लाख में)
|
(लाइनें
लाख में)
|
(लाइनें
लाख में)
|
|
|
अमरीका
|
28.59
|
36211
|
1900
|
1270
|
3170
|
110.88
|
|
यू0के0
|
6.01
|
23694
|
353.26
|
470.26
|
823.52
|
137.02
|
|
ऑस्ट्रेलिया
|
1.93
|
19897
|
100.6
|
111.69
|
212.29
|
109.99
|
|
ब्राजील
|
17.18
|
3500
|
374.31
|
287.46
|
661.77
|
38.52
|
|
मेक्सिको
|
10.04
|
5807
|
137.73
|
217.57
|
355.3
|
35.39
|
|
दक्षिण
अफ्रीका
|
4.38
|
2882
|
49.69
|
91.97
|
141.66
|
32.36
|
|
मिस्र
|
6.46
|
1424
|
66.5
|
27.94
|
94.44
|
14.63
|
|
जापान
|
12.73
|
34337
|
760
|
748.19
|
1508.19
|
118.45
|
|
मलेशिया
|
2.38
|
3838
|
47.38
|
71.28
|
118.66
|
49.86
|
|
चीन
|
129.61
|
834
|
1790.34
|
1448.12
|
3238.46
|
24.98
|
|
पाकिस्तान
|
14.5
|
425
|
34
|
8
|
42
|
2.9
|
|
भारत
|
102.7
|
455
|
347.32
|
64.31
|
411.63
|
4.01
|
|
एशिया
|
360.67
|
2354
|
3911.79
|
3366.14
|
7277.93
|
20.17
|
|
विश्व
|
607.91
|
5274
|
10460.88
|
9462.97
|
19923.85
|
32.78
|
स्रोत
स्रोत
:
विश्व दूरसंचार
विकास रिपोर्ट-2002
*
प्रति व्यक्ति
आय से संबंधित आंकड़ेर् वा
2000
के
हैं।
|
टेली-घनत्व - अंतरराट्रीय
तुलना (31.12.2001)
देश |
मुख्य टेलीफोन लाइनें (लाख
में)
|
टेली-घनत्व
|
|
|
1995
|
2001
|
सीएजीआर
% |
1995
|
2001
|
सीएजीआर
% |
|
अमरीका
|
1597.35
|
1900
|
2.9
|
60.73
|
66.45
|
1.5
|
|
यू0के0
|
294.11
|
353.26
|
3.1
|
50.18
|
58.8
|
2.7
|
|
ऑस्ट्रेलिया
|
89
|
100.6
|
2.1
|
49.25
|
52.02
|
0.9
|
|
ब्राजील
|
132.63
|
374.3
|
18.9
|
8.51
|
21.78
|
17
|
|
मेक्सिको
|
88.01
|
137.73
|
7.7
|
9.39
|
13.72
|
6.5
|
|
दक्षिण
अफ्रीका
|
40.02
|
49.69
|
3.7
|
10.14
|
11.35
|
1.9
|
|
मिस्र
|
27.16
|
66.5
|
16.1
|
4.67
|
10.3
|
14.1
|
|
जापान
|
622.92
|
760
|
3.4
|
49.61
|
59.69
|
3.1
|
|
मलेशिया
|
33.32
|
47.38
|
6
|
16.57
|
19.91
|
3.1
|
|
चीन
|
407.05
|
1790.34
|
28
|
3.3
|
13.81
|
26.9
|
|
पाकिस्तान
|
21.27
|
34
|
8.1
|
1.67
|
2.35
|
5.8
|
|
भारत# |
119.78
|
347.32
|
19.4
|
1.29
|
3.38
|
17.4
|
|
एशिया
|
1816.88
|
3911.79
|
13.6
|
5.46
|
10.85
|
12.1
|
|
विश्व
|
6892.51
|
10460.9
|
7.2
|
12.29
|
17.21
|
5.8
|
स्रोत
:
विश्व दूरसंचार विकास रिपोर्ट
2002
# : 64.31
लाख कलेक्टर कनेक्शनों (31.03.2002)
सहित
450.26
लाख कुल
टेलीफोन कनेक्शनों के आधार पर
टेली-घनत्व
4.4 बनता
है।
इन देशों हेतु प्रति व्यक्ति आय,
पीसी की संख्या,
इंटरनेट प्रयोक्ता
आदि जैसे अन्य
संकेतकों
सहित टेली-घनत्व की स्थिति निम्नानुसार देखी जा सकती है
:
दूरसंचार विकास - अंतरराट्रीय
तुलना
|
(दिसम्बर,
2001 की स्थिति के अनुसार)
देश |
जनसंख्या
|
प्रतिव्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद
|
डीईएल
स्थिर
|
टेली-घनत्व
|
पीसी की संख्या
|
इंटरनेट प्रयोक्ता
|
|
|
(करोड़
में)
|
(अमरीकी
डालर)
|
(लाइनें
लाख में)
|
|
प्रति
100
व्यक्तियों पर
|
प्रति
10000
व्यक्तियों परs |
|
अमरीका
|
28.59
|
36211
|
1900
|
66.45
|
62.25
|
4995.1
|
|
यू0के0
|
6.01
|
23694
|
353.26
|
58.8
|
36.62
|
3995.01
|
|
ऑस्ट्रेलिया
|
1.93
|
19897
|
100.6
|
52.02
|
51.71
|
3723.05
|
|
ब्राजील
|
17.18
|
3500
|
374.3
|
21.78
|
6.29
|
465.58
|
|
मेक्सिको
|
10.03
|
5807
|
137.73
|
13.72
|
6.87
|
362.23
|
|
दक्षिण
अफ्रीका
|
4.38
|
2882
|
49.69
|
11.35
|
6.85
|
700.58
|
|
मिस्र
|
6.45
|
1424
|
66.5
|
10.3
|
1.55
|
92.95
|
|
जापान
|
12.73
|
34337
|
760
|
59.69
|
34.87
|
4547.1
|
|
मलेशिया
|
2.38
|
3838
|
47.38
|
19.91
|
12.61
|
2394.96
|
|
चीन
|
129.61
|
834
|
1790.34
|
13.81
|
1.93
|
260
|
|
पाकिस्तान
|
14.5
|
425
|
34
|
2.35
|
0.41
|
34.49
|
|
भारत# |
102.71
|
455
|
347.32
|
3.38
|
0.58
|
68.16
|
|
एशिया
|
360.67
|
2354
|
3911.79
|
10.85
|
3.31
|
437.49
|
|
विश्व
|
607.91
|
5274
|
10460.9
|
17.21
|
8.42
|
823.24
|
स्रोत
:
विश्व दूरसंचार
विकास रिपोर्ट
2002
# :
64.31
लाख कलेक्टर कनेक्शनों (31.3.2002)
सहित कुल
450.26
लाख टेलीफोन कनेक्शनों के आधार पर टेली-घनत्व
4.4
आता है।
* :
जनसंख्या और आय
(सकल घरेलू उत्पाद) के आंकड़ेर् वा
2000
से
संबंधित हैं।
4.3
सूचना प्रौद्योगिकी,
सूचना एवं
प्रसारण तथा अन्य सम्बध्द सेक्टरों तथा अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों की
आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उक्त क्षेत्र का विस्तार,
विशेाकर
ब्रॉडबैंड के संदर्भ में,
तीव्र गति
से करने की जरूरत है। इस परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए,
उक्त
क्षेत्र को अगले दशक के लिए अनिवार्य रुप से एक अवसंरचना क्षेत्र का दर्जा देने की
आवश्यकता है। एक बार अपेक्षित टेलीघनत्व प्राप्त कर लेने तथा आवश्यक सहायक नेटवर्क
सृजित कर लिए जाने पर इस क्षेत्र को सेवा क्षेत्र का दर्जा दिया जा सकता है।
4.4
आगामी वर्ाों में अधिकतम विकास सुनिश्चित करने के लिए दूरसंचार क्षेत्र के लिए
सरकार की करों और विनयमों से संबंधित आम नीति प्रोत्साहक स्वरूप की है। सरकार
द्वारा संसाधन जुटाने अथवा राजस्व का सृजन जैसे कारकों से इस सेक्टर को चलाने वाली
नीति निर्धारित नहीं होनी चाहिए। राजस्व हिस्सेदारी और स्पेक्ट्रम प्रभारों के रुप
में लाइसेंसशुल्क की वसूली इसी सिध्दांत के द्वारा निर्देशित होगी।
4.5
विभिन्न क्षेत्रों
में अनेक प्रचालकों के मौजूद होने से उन शर्तों का निर्धारण करने की आवश्यकता है जो
उन्हें निर्बाध रूप से कार्य करने हेतु सहायक होंगी। बहु-प्रचालक प्रणाली विकसित
करने तथा बिना किसी बाधा के उपभोक्ताओं की संख्या में वृध्दि करने के लिए वातावरण
तैयार करने हेतु विशेा योजना बनाने की जरूरत पड़ेगी।
4.6
रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) स्पेक्ट्रम एक दुर्लभ प्राकृतिक स्रोत है। अंतरराट्रीय
संधियों के अनुसार इसका उपयोग सह-अस्तित्व और सर्वाधिक दक्ष उपयोग के सिध्दांतों के
आधार पर बड़ी संख्या में रक्षा,
सिविल,
सरकारी और
निजी रेडियो संचार सेवाओं और प्रयोक्ताओं द्वारा किया जाना है। टेलीफोनों की कुल
संख्या में सेल्यूलर मोबाइल की बढती हुई संख्या फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम का आबंटन
संबंधी नीति पर अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। सेल्यूलर
मोबाइल फोन के अलावा,
जिसकी
लइनों में दसवीं योजना के अंत तक बड़ी संख्या में वृध्दि हो जाएगी,
बुनियादी
सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले डब्ल्यूएलएल के लिए भी
फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम की जरूरत पड़ेगी । नई प्रौद्योगिकी का आगमन भी रेडियो
स्पेक्ट्रम के योजनाकारों के समक्ष कठिन चुनौती पेश करेगा। वायरलेस प्रौद्योगिकियों
को अपनाए जाने तथा अंतर्राट्रीय मानकों पर खरा उतरने की आवश्यकता के यह मायने हैं
कि वायरलेस स्पेक्ट्रम की कमी को पूरा करने तथा कतिपय फ्रीक्वेंसी बैंड के लिए
प्रतिस्पर्धी मांगों का समाधान करने की जरूरत पड़ेगी। स्पेक्ट्रम आबंटन और
लाइसेंसिंग को अभिशासित करने वाली नीति को इस तरह से तैयार करना पड़ेगा कि इस दुर्लभ
संसाधन का इटतम उपयोग किया जा सके तथा यह विकास में बाधक न बन सके।
4.7
यद्यपि भारत की लगभग
70% आबादी
गांवों में बसती है तथा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग
30
प्रतिशत के लिए ग्रामीण क्षेत्र उत्तरदायी है,
तथापि इन
क्षेत्रों में हुए दूरसंचार विकास को कदापि संतोाजनक नहीं कहा जा सकता। शहरी
क्षेत्रों के
10.16
टेलीघनत्व के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों का टेलीघनत्व केवल
1.14
है। सामान्य अभिगम्यता के लिहाज से भी देश से कुल गांवों के लगभग एक-तिहाई गांवों
में अभी भी बुनियादी दूरसंचार सुविधएं उपलब्ध कराई जानी हैं। नई दूरसंचार नीति-
1999
के अनुसार सरकार
2002
तक शेा गांवों में वॉयस और कम गति की डाटा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबध्द
है। बीएसएनएल की स्थापना के द्वारा दूरसंचार विभाग के नेटवर्क का निगमीकरण होने पर
ग्रामीण टेलीफोनी अब सार्वजनिक क्षेत्र के मुख्य उत्तरदायित्व के तहत नहीं आती है।
4.8
सार्वजनिक क्षेत्र
को दसवीं योजना के दौरान बुनियादी दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण
भूमिका निभाना जारी रखना पड़ेगा। दसवीं योजना के दौरान उपलब्ध कराए जाने वाले लगभग
828
लाख नए कनेक्शनों
में से सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों अर्थात् बीएसएनएल और एमटीएनएल के द्वारा
395.23
लाख अतिरिक्त
कनेक्शन प्रदान किए जाने की आशा है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क के विस्तार हेतु
बीएसएनएल को सरकार से कोई बजटीय सहायता नहीं मिलेगी। तथापि,
सार्वजनिक
क्षेत्र यूएसओ सहायता और अन्य संसाधनों के माध्यम से प्राप्त होने वाले अतिरिक्त
संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर दसवीं योजना अवधि के दौरान मुख्य सेवाओं के लिए
अधिक ऊँचे लक्ष्य हासिल कर सकता है। दसवीं योजना में सेल्यूलर सेवाएं भी सार्वजनिक
क्षेत्र की विस्तार योजनाओं का मुख्य हिस्सा होंगी। कंपनी द्वारा तैयार की गई
योजनाओं के अनुसार सेल्यूलर सेवाओं में एक प्रमुख राट्रीय प्रचालक के रुप में
बीएसएनएल की मुख्य भूमिका रहने की संभावना है।
4.9
दसवीं योजना के
दौरान दूरसंचार सेवाओं के विस्तार में निजी निवेश की भी अग्रणी भूमिका रहने की
उम्मीद है। मूल्यवर्धित सेवाओं के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की प्रमुख भूमिका जारी
रहेगी। निजी प्रचालकों द्वारा निवेश की राशि का निर्धारण बुनियादी रुप से बुनियादी
और मूल्यवर्धित दोनों प्रकार की सेवाओं पर किए गए ऐसे निवेश पर मिलने वाली आय की दर
से होगा। घरेलू निजी क्षेत्र के संसाधनों को बढाने में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
(एफडीआई) की भी प्रमुख भूमिका रहेगी,
क्योंकि
परिकल्पित निवेश की राशि बहुत अधिक है।
5.
दसवीं योजना के
उद्देश्य और लक्ष्य
5.1
दसवीं योजना की
नीतियां और कार्यक्रम सूचना प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्र (सेक्टर)की जरूरतों और
आधुनिक अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को न्यूनतम लागत आधार पर पूरा करने के उद्देश्य
से एक विश्वस्तरीय दूरसंचार अवसंरचना के सृजन के बुनियादी लक्ष्य द्वारा निर्देशित
हैं। दसवीं योजना में नीतियों का अन्य लक्ष्य उपभोक्ताओं के लिए संतोाजनक सेवाएं
प्रदान करना तथा सभी के लिए और सभी जगह बुनियादी दूरसंचार सेवाएं सुलभ और वहनीय
बनाना है। दसवीं योजना में परिकाल्पित मुख्य उद्देश्य निम्नानुसार हैं
:
(i)
सभी
नागरिकों को वहनीय और प्रभावी संचार सेवाएं उपलब्ध कराना।
(ii)
ग्रामीण
क्षेत्रों सहित उन सभी क्षेत्रों में सार्वभौमिक सेवा उपलब्ध कराना जहां ये उपलब्ध
नहीं है।
(iii)
दूरसंचार,
सूचना
प्रौद्योगिकी और मीडिया की अभिसारिता को पूरा करने के लिए आधुनिक और दक्ष दूरसंचार
अवसरंचना का निर्माण करना ।
(iv)
दूरसंचार
क्षेत्र लिए एक प्रतिस्पर्धी वातावरण तैयार करना जिसमें सभी प्रचालकों को समान अवसर
प्रदान किए जा सकें।
(v)
देश में
अनुसंधान और विकास संबंधी प्रयासों में तेजी लाना ।
(vi)
स्पेक्ट्रम
प्रबंधन में दक्षता और पारदर्शिता प्राप्त करना।
(vii)
देश के
रक्षा और सुरक्षा संबंधी हितों का संरक्षण करना।
(viii)
भारतीय
दूरसंचार कम्पनियों को वास्तव में विश्वस्तरीय स्वरूप प्रदान करने हेतु समर्थ
बनाना।
5.2
दसवीं योजना का
मूल उद्देश्य वहनीय कीमतों पर विश्व स्तरीय सेवाएं उपलब्ध कराना होगा। दूरसंचार
नेटवर्क के निगमीकरण के साथ सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के नेटवर्क विस्ताररोल-आउट
योजनाएं विभिन्न सेवाओं की मांग द्वारा निर्देशित होंगी। नई दूरसंचार नीति,
1999 के
व्यापक उद्देश्यों और दसवीं योजना के लिए परिकल्पित उद्देश्यों के मद्देनज़र दसवीं
योजना के लिए दूरसंचार क्षेत्र हेतु निम्नलिखित विशेा लक्ष्यों की परिकल्पना की गई
है :
·
र्
वा
2002-03
के अंत तक कमोबेश मांग पर टेलीफोन उपलब्ध कराने तथा इसके पश्चात
इस स्थिति को बनाए रखने हेतु प्रयास करना।
·
31
मार्च, 2007
तक 9.91
का समग्र टेलीघनत्व प्राप्त करना।
·
दिसंबर,
2002 तक देश के सभी गांवों में दूरसंचार सुविधाएं उपलब्ध कराना
तथा सभी ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय पारेाण माध्यम मुहैया कराना।
·
मार्च,
2003 के अंत तक सभी एक्सचेंजों में विश्वसनीय माध्यम उपलब्ध
कराना।
·
मार्च,
2003 तक दो लाख से अधिक की आबादी वाले सभी शहरों में आईएसडीएन
सहित प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके उच्च-गति डाटा और मल्टीमीडिया क्षमता उपलब्ध
कराना।
6.
दसवीं योजना के
दौरान नेटवर्क का विस्तार
6.1
नई दूरसंचार नीति,
1999 में
देश में दूरसंचार क्षेत्र के भावी विकास और संवर्धन के लिए बुनियादी ढांचे की
व्यवस्था की गई है। नीति का मुख्य उद्देश्य र्
वा
2002
तक मांग पर टेलीफोन उपलब्ध कराना तथ इसके पश्चात इसे बरकरार रखना है ताकिर् वा
2005
तक टेलीघनत्व
7
तथार् वा
2010
तक 15
के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। टेलीघनत्व के उपर्युक्त लक्ष्यों के मद्देनजर,
देश में
दसवीं योजना के अंत तक अर्थात मार्च,
2007 तक
समग्र रुप से
9.91
का टेलीघनत्व प्राप्त करने की जरूरत है। टेलीघनत्व के उपर्युक्त लक्ष्य को हासिल
करने के लिए दसवीं योजना के दौरान लगभग
650
लाख अतिरिक्त कनेक्शन उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ेगी। मार्च,
2007 तक
11.5
के टेलीघनत्व के लक्ष्य को हासिल करने की धारणा पर कार्य करने के दृ31टिगत
दसवीं पंचवर्ाीय योजना के लिए दूरसंचार क्षेत्र संबंधी कार्यदल ने सिफारिश की थी
कि दसवीं योजना के दौरान
817.10
लाख नए कनेक्शन
उपलब्ध कराए जाने की जरूरत पड़ेगी। विकास के वर्तमान रूझान,
सार्वजनिक
क्षेत्र द्वारा तैयार की गई योजनाओं और निधियों की उपलब्धता को देखते हुए कार्यदल
का अनुमान निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। उपर्युक्त कारकों को ध्यान में रखते हुए,
मार्च,
2007 तक
9.91
के टेलीघनत्व के
लक्ष्य को हासिल करना अधिक वास्तविक प्रतीत होता है। दसवीं योजना अवधि के दौरान
लाइनों की निवल वृध्दि में से सेल्यूलर,
फिक्स्ड और
डब्ल्यूएलएल आधारित सीमित मोबिलिटी की लाइनों का वितरण बाजार के उभरते हुए रूझान,
प्रौद्योगिकीय नव तकनीकों की उपलब्धता और विकल्प तथा उपस्करों की सापेक्ष कीमतों पर
निर्भर करेगा। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड
(एमटीएनएल) द्वारा तैयार की गई आरंभिक योजनाओं के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा
लगभग
395
लाख अतिरिक्त
कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की परिकल्पना की गई है। इससे यह निर्का निकलता है कि
शेा कनेक्शन अर्थात लगभग
255
लाख कनेक्शन निजी क्षेत्र द्वारा उपलब्ध कराए जाने हैं। निजी क्षेत्र का
कार्य-निपादन उत्साहजनक है। इसलिए टेलीघनत्व का उच्च लक्ष्य हासिल किया जा सकता
है।
6.2
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल)
भारत
संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की स्थापना 1.10.2000 को
पूर्ववर्ती दूरसंचार विभाग का पुनर्गठन किए जाने के परिणामस्वरूप की गई थी। इसके
साथ ही सेवा प्रदान किए जाने और विनियमन के कार्य से नीति निर्माण के कार्य को अलग
करने की सुधारात्मक प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस पुनर्गठन के बीएसएनएल के लिए दो
महत्वपूर्ण प्रभाव थे,
अर्थात
(i)
अब से
बीएसएनएल को एक वाणिज्यिक संगठन के रुप में कार्य करना है
;
अन्य बातों के
साथ-साथ इसकी निवेश नीतियां लाभपूर्णतया वाणिज्यिक दृ31टि
से तैयार की जानी हैं।
(ii)
बीएसएनएल
पर निगमित कर,
लाइसेंस शुल्क,
लाभांश का
भुगतान आदि जैसी अतिरिक्त वित्तीय देयताएं लगाई जाएंगी,
जो
पूर्ववर्ती दूरसंचार विभाग पर लागू नहीं होती थीं।
कंपनी
के पास उपलब्ध संसाधनों के आधार पर, दसवीं योजना के
दौरान इसकी 367.67 लाख नए कनेक्शन प्रदान करने की योजना
है। मोबाइल सेवाओं की अनुमानित मांग को ध्यान में रखते हुए,
कंपनी द्वारा मुख्य रुप से विभिन्न सकिर्लाें में तृतीय प्रचालक
के रुप में सेल्युलर मोबाइल सेवाओं का विस्तार करने पर जोर देने की परिकल्पना की गई
है। निम्नलिखित तालिका में कंपनी द्वारा दसवीं योजना के दौरान परिकल्पित विस्तार
कार्यक्रम के विस्तृत ब्योरे दिए गए हैं
:-
नेटवर्क का
विस्तार -बीएसएनएल(लाख )
|
फोनों
की किस्म |
शहरी
|
ग्रामीण
|
कुल
|
|
स्थिर
|
80
|
0.9
|
80.9
|
|
डब्ल्यूएलएल
|
51
|
11.93
|
62.93
|
|
मोबाइल
|
222
|
1.84
|
223.84
|
|
कुल
|
353
|
14.67
|
367.67
|
महानगर
टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल)
एमटीएनएल
ने 2000 तक दिल्ली और मुम्बई,
इन दोनों महानगरों में अपने एकाधिकार का लाभ उठाया, जहां
यह अपना प्रचालन करता है। उसके बाद से निजी प्रचालकों ने मुम्बई में बुनियादी
सेवाएं प्रदान करना प्रारंभ कर दिया और आशा है कि दिल्ली में भी यह सेवा शुरु कर
देंगे। दसवीं योजना के दौरान निजी प्रचालकों से प्रतिस्पध्र्दा में बढाेत्तरी होने
की संभावना है। मुम्बई और दिल्ली में अपनी प्रमुख सेवा प्रदाता की स्थिति को बनाए
रखने की दृ31टि से एमटीएनएल ने दसवीं योजना के दौरान
अपने सेल्युलर नेटवर्क का व्यापक स्तर पर विस्तार करने की परिकल्पना की है। इंटरनेट
सेवाओं का विस्तार करना और सूचना प्रौद्योगिकी से संबध्द सेवाओं की शुरुआत करना
कंपनी की विकास और प्रतिस्पध्र्दा की समूची कार्यनीति का अन्य प्रमुख घटक है। कंपनी
द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार दसवीं योजना के दौरान 11.57
लाख सेल्युलर फोनों सहित 27.56
लाख
अतिरिक्त टेलीफोन कनेक्शन प्रदान किए जाने की संभावना है। कंपनी के समूचे पूंजीगत
परिव्यय का वित्तपोाण आंतरिक एवं अतिरिक्त बजटीय संसाधनों से किए जाने की
परिकल्पना की गई है।
6.4
टेलीमैटिक्स विकास केन्द्र (सी-डॉट)
सी-डॉट
दूरसंचार के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के कार्यकलापों में लगी हुई सार्वजनिक
क्षेत्र की मुख्य एजेंसी है। यह ग्रामीण एक्सचेंजों के विकास कार्य में अग्रणी रही
है जिनका कार्य-निपादन कठिन परिस्थितियों भी अत्यंत श्रेठ रहा है। सी-डॉट
प्रौद्योगिकी में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क में कार्य कर रही कुल लाइनों का
40 प्रतिशत से अधिक भाग आता है। सी-डॉट के लाइसेंसशुदा
विनिर्माता भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों के समान परिस्थितियों वाले अन्य देशों को
प्रौद्योगिकी स्विचों का निर्यात कर रहे हैं।
दसवीं
योजना के दौरान,
सी-डॉट की अनुसंधान योजना में मुख्य रुप
से अन्य वैश्विक सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं और विशिटताओं के
समान सेवाएं और विशिटताएं प्रदान करने वाली किफायती प्रौद्योगिकियों का विकास करने
पर जोर दिया जाएगा। ब्रॉडबैंड स्थिर तथा मोबाइल उपभोक्ता अभिगम प्रणाली और साथ ही
बैकबोन प्रणालियों वाले हाई-बैंड की आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु उत्पादों का
विकास करना दसवीं योजना की कार्यनीति का महत्वपूर्ण भाग होगा । जिन प्रमुख
क्षेत्रों पर मुख्य रुप से जोर दिया जाना है उनमें से कुछ इस प्रकार हैं
:-
·
इंटेलीजेंट
नेटवर्क सेवाएं
·
जीएसएम
व्यक्तिगत संचार सेवाएं
· तीसरी
पीढी क़ी मोबाइल संचार प्रणाली
· के
ए बैंड उपग्रह संचार
· वायस
तथा डाटा कन्वर्जेन्स हेतु सेल तथा पैकेट स्विचन प्रौद्योगिकियां
· अति
उच्च बिट दर का नेटवर्क बैकबोन
· मौजूदा
वायरलाइन नेटवर्क
8.5.67 की विस्तार योजना
सितंबर,
2000 तक,
सी-डॉट के योजनागत परिव्यय
का वित्त-पोाण दूरसंचार विभाग द्वारा सृजित आंतरिक संसाधनों से किया गया था।
बीएसएनएल के रुप में एक अलग निगमित संगठन बना देने से वित्तपोाण का यह तरीका अब
उपलब्ध नहीं रहेगा और योजनागत परिव्यय का वित्तपोाण बजटीय सहायता के माध्यम से किए
जाने की आवश्यकता है।
किसी भी
क्षेत्र में भावी विकास सुनिश्चित करने की दृ31टि से
अनुसंधान एवं विकास के कार्यकलाप किया जाना अत्यंत अनिवार्य होता है अत: इसके लिए
पूर्ण सहायता दिए जाने की आवश्यकता है। तथापि, यह
उल्लेखनीय है कि सी-डॉट के अनुसंधान एवं विकास का एक प्रमुख लाभग्राही होने के नाते,
इस उद्योग द्वारा इसके कार्यकलापों के वित्तपोाण में पूरा
सहयोग दिए जाने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, सी-डॉट
को सरकारी सहायता पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए रायल्टी,
परामर्श सेवा आदि के जरिए आंतरिक संसाधन सृजित करने पर अधिक
ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
7.
भावी लक्ष्य
:
7.1
दसवीं योजना में
वहनीय दरों पर विश्व स्तरीय दूरसंचार सुविधाएं प्रदान करने,
दूरसंचार,
सूचना
प्रौद्योगिकी और मीडिया की अभिसारिता की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा कवर नहीं किए
गए सभी क्षेत्रों को सार्वभौमिक सेवा उपलब्ध कराने की दृ31टि
से आधुनिक एवं कुशल दूरसंचार अवसंरचना का निर्माण करने का प्रयास किया जाएगा।
उपर्युक्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दसवीं योजना में किए जाने के लिए
परिकल्पित प्रमुख प्रयासकार्रवाई की मदें इस प्रकार हैं
:
(i)
मार्च,
2007 तक
9.91
के टेलीघनत्व के लक्ष्य को पूरा करने के लिए,
योजना अवधि
के दौरान लगभग
650
लाख नए टेलीफोन कनेक्शन प्रदान किए जाने की आवश्यकता है।
(ii)
नई
दूरसंचार नीति (एनटीपी),
1999 में
निर्धारित किए गए उद्देश्यों के अनुरूप टेलीघनत्व के लक्ष्यों को पूरा करने की दृ31टि
से दूरसंचार क्षेत्र को अगले दशक के लिए अथवा लगभग इतनी अवधि के लिए अवसंरचना
क्षेत्र के रुप में स्वीकार किए जाने की आवश्यकता है। अर्थव्यवस्था के अन्य
क्षेत्रों,
विशेाकर सूचना
प्रौद्योगिकी और मनोरंजन के क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने की दृ31टि
से ब्रॉडबैंड का पर्याप्त रुप से उच्चतर दर से विकास का लक्ष्य पूरा करने के लिए भी
इसकी परिकल्पना की गई है।
(iii)
आगामी
वर्ाों में इटतम विकास सुनिश्चित करने की दृ31टि
से सरकार की दूरसंचार क्षेत्र के लिए करों तथा विनियमन से संबंधित विस्तृत नीति
प्रोत्साहनजनक प्रकृति की होनी चाहिए।
(iv)
विकास को
उच्च बनाए रखने के लिए बहु-प्रचालक परिवेश में उचित तथा समयबध्द अंतर्संयोजन
सुनिश्चित करना एक प्रमुख प्रयास है।
(v)
स्पेक्ट्रम
आबंटन और लाइसेंसिंग कार्य को शासित करने की नीति इस प्रकार से बनाई जाए जिससे इस
दुर्लभ संसाधन का अधिकतम उपयोग हो और ऐसी नीति विकास के लिए बाधा न बने। स्पेक्ट्रम
का मूल्य निर्धारण स्थान और समय के अनुसार सापेक्ष मांग और पूर्ति पर सक्रिय रुप
में आधारित होना आवश्यक है और इससे स्पेक्ट्रम सामर्थ्य वाली प्रौद्योगिकी की
शुरूआत को बढावा मिलना चाहिए। उपलब्ध स्पेक्ट्रम के एक बड़े भाग का उपयोग रक्षा,
पुलिस तथा
अर्ध्द सैनिक बलों द्वारा किया जा रहा है।
(vi)
यूएसओ के
प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निधियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जानी है।
(vii)
नई
दूरसंचार नीति, 1999
के उद्देश्यों के अनुसार,
ग्रामीण
क्षेत्रों में टेलीघनत्व को बढावा देने की दृ31टि
से ग्रामीण दूरसंचार सेवाओं के विकास कार्य को शासित करने की नीति की प्रकृति
प्रोत्साहनजनक होना आवश्यक है।
7.2
दसवीं योजना के लिए दूरसंचार क्षेत्र हेतु
1500
करोड़ रुपए की बजटीय सहायता सहित
86984.00
करोड़ रुपए का परिव्यय अनुमोदित किया गया है।
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