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विनियामकों का
सुदृढीक़रण
भारतीय दूरसंचार
विनियामक प्राधिकरण (ट्राई)#
hhttp://www.trai.gov.in
दूरसंचार सेवाओं
को उपलब्ध कराने के क्षेत्र में निजी क्षेत्र के शामिल होने से,
एक स्वतंत्र विनियामक निकाय की आवश्यकता महसूस
हुई । बुनियादी दूरसंचार सेवा के क्षेत्र में निजी क्षेत्र के
प्रवेश हेतु जारी दिशा-निर्देशों में उपर्युक्त आवश्यकता का उल्लेख
किया गया है । तदनुसार, भारतीय दूरसंचार
विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) का गठन ट्राई (अध्यादेश) 1997
के अनुसरण मेंर् वा 1997
में किया गया, जिसे
दूरसंचार सेवाओं को विनियमित करने के उद्देश्य से संसद के एक
अधिनियम द्वारा बाद में प्रतिस्थापित किया गया । ट्राई को अपने कुछ
प्रमुख सिफारिशी, विनियामक एवं प्रशुल्क
निर्धारण प्रकार्यों के तहत जिन मामलों में सिफारिश करनी होती है
वे हैं - नए सेवा प्रदाता की आवश्यकता और उनकी सेवा शुरूआत का समय
निर्धारण, सेवा प्रदाता को दिए जाने
वाले लाइसेंस की शर्त का निर्धारण,
लाइसेंस संबंधी शर्त के अनुपालन को सुनिश्चित करना,
स्पैक्ट्रम का कुशल प्रबंधन,
सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली
सेवा की गुणवत्ता के मानकों का निर्धारण तथा दूरसंचार सेवा के
ग्राहकों के हित की रक्षा करने हेतु सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान
की जाने वाली ऐसी सेवा का आवधिक सर्वेक्षण करना और सेवा की
गुणवत्ता को सुनिश्चित करना, सार्वभौमिक
सेवा दायित्वों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना,
इस अधिनियम के तहत भारत में और भारत से बाहर
उपलब्ध दूरसंचार सेवाओं की दरों को अधिसूचित करना,
इत्यादि ।
ट्राई अधिनियम की
धारा (2)
की उप-धारा (1) के
परंतुक (ट) के# द्वारा प्रदत्त शक्तियों
का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार ने
दिनांक 9 जनवरी, 2004
की अधिसूचना सं0 का0
आ0 44 (ई) के तहत
न्नप्रसारण सेवाओं न्न और न्नकेबल सेवाओं न्न को अधिसूचित कर दिया
।
ट्राई (संशोधन)
अधिनियम, 2000
के तहत प्राधिकरण का पुनर्गठन किया गया था ।
इसमें अध्यक्ष के अतिरिक्त दो पूर्णकालिक सदस्य और दो अंशकालिक
सदस्य हैं । प्राधिकरण की वर्तमान संरचना निम्नानुसार है#
ः
श्री नृपेन्द्र मिश्र अध्यक्ष
श्री ए.के. साहनी सदस्य
श्री आर. एन. प्रभाकर सदस्य
प्रोफेसर एन. बालकृणन अंशकालिक सदस्य
डा0
राजीव कुमार अंशकालिक सदस्य
ट्राई के अधीनस्थ विधान
nùूरसंचार
विवाद समाधान एवं अपील अधिकरण (टीडीएसएटी)#
http://www.tdsat.nic.in
दूरसंचार विवाद
समाधान एवं अपील अधिकरण (टीडीएसएटी) के नाम से एक अपील अधिकरण का
गठन केन्द्र सरकार ने मई
2000 में
किया । इस अधिकरण के गठन का कार्य लाइसेंस प्रदाता और लाइसेंसधारक
के बीच, दो या दो से अधिक सेवा
प्रदाताओं के बीच, सेवा प्रदाता और
ग्राहकों के समूह के बीच, किसी विवाद पर
निर्णय देने तथा भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के किसी निदेश,
निर्णय या आदेश के विरुध्द दायर अपील की सुनवाई
और निपटान करना है। अत: इस अधिकरण के क्षेत्राधिकार में याचिका और
अपील याचिका दोनों हैं ।
इस अपील अधिकरण के
अंतिम आदेश के विरुध्द इस अधिनियम की धारा
18 के तहत
सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का प्रावधान है। लेकिन इस अपील
अधिकरण के अंतवर्ती आदेश के विरुध्द सर्वोच्च न्यायालय में अपील
नहीं किया जा सकता है।
अधिनियम
1997 की
धारा 14 ख (1)
के तहत यह प्रावधान है कि केन्द्र सरकार द्वारा
जारी अधिसूचना के तहत, इस अपील अधिकरण
में अध्यक्ष होंगे और दो से अधिक सदस्यों की नियुक्ति नहीं की
जाएगी ।
टीडीएसएटी की
वर्तमान संरचना निम्नवत है#
ः
·माननीय
न्यायधीश अरूण कुमार (अध्यक्ष)
·लेपिऊटनेट
जेनेरल डी0पी0
सहगल (सेवा निवृत्त),
सदस्य
मौटे तौर पर,
अपील अधिकरण में दायर मामले से जुडे
मुद्दे-अंतर्संयोजन, लाइसेंसदाता द्वारा
लाइसेंस शुल्क की गणना के आधार की चुनौती,
आवृत्ति आवंटन हेतु लाइसेंस शुल्क एवं रॉयल्टी
संबधी अनुचित लेवी एवं प्रभार, सेवा
प्रदाताओं के एक समूह द्वारा कॉलों का अवरोधन,
त्रुटिपूर्ण परियात से संबंधित विवाद,
ट्राई द्वारा निर्धारित प्रशुल्क को दी गई
चुनौतियां, बैंक गारंटी को भुनाया जाना,
प्रसारकों के बीच विवाद,
इत्यादि से संबंधित होते हैं ।
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